ध्यान में मन क्यों भटकता है?
ध्यान में मन क्यों भटकता है?
मन का स्वभाव निरंतर विचार उत्पन्न करना और विषयों की ओर जाना है। दिनभर की घटनाएँ, इच्छाएँ, चिंताएँ और पुराने संस्कार ध्यान में उभर सकते हैं। इसलिए मन के भटकने पर स्वयं को दोषी नहीं मानना चाहिए। विचारों से संघर्ष करने के बजाय उनका साक्षी बनकर पुनः सहजता से ध्यान में लौटना अधिक उपयोगी है। नियमित अभ्यास से मन धीरे-धीरे शांत और एकाग्र होने लगता है।
पूरा लेख पढ़ें
मन का स्वभाव निरंतर विचार उत्पन्न करना और विषयों की ओर जाना है। दिनभर की घटनाएँ, इच्छाएँ, चिंताएँ और पुराने संस्कार ध्यान में उभर सकते हैं। इसलिए मन के भटकने पर स्वयं को दोषी नहीं मानना चाहिए। विचारों से संघर्ष करने के बजाय उनका साक्षी बनकर पुनः सहजता से ध्यान में लौटना अधिक उपयोगी है। नियमित अभ्यास से मन धीरे-धीरे शांत और एकाग्र होने लगता है।