ध्यान में प्रकाश, ध्वनि और कंपन का अनुभव

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ध्यान में प्रकाश, ध्वनि और कंपन का अनुभव

साधना के दौरान कुछ साधकों को आंतरिक प्रकाश, रंग, नाद, स्पंदन अथवा शरीर में सूक्ष्म कंपन अनुभव हो सकता है। योग-परंपरा में इनके विभिन्न अर्थ बताए गए हैं, किंतु प्रत्येक अनुभव को दिव्य संकेत समझना आवश्यक नहीं है। शारीरिक अवस्था, मानसिक स्थिति और वातावरण भी अनुभवों को प्रभावित कर सकते हैं। साधक को शांत रहकर इनका साक्षी बनना चाहिए तथा आवश्यकता होने पर गुरु से मार्गदर्शन लेना चाहिए।

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साधना के दौरान कुछ साधकों को आंतरिक प्रकाश, रंग, नाद, स्पंदन अथवा शरीर में सूक्ष्म कंपन अनुभव हो सकता है। योग-परंपरा में इनके विभिन्न अर्थ बताए गए हैं, किंतु प्रत्येक अनुभव को दिव्य संकेत समझना आवश्यक नहीं है। शारीरिक अवस्था, मानसिक स्थिति और वातावरण भी अनुभवों को प्रभावित कर सकते हैं। साधक को शांत रहकर इनका साक्षी बनना चाहिए तथा आवश्यकता होने पर गुरु से मार्गदर्शन लेना चाहिए।

ध्यानातील प्रकाश, ध्वनी आणि कंपन

साधनेत काहींना अंतर्गत प्रकाश, रंग, नाद, स्पंदन किंवा शरीरात सूक्ष्म कंपन जाणवू शकते. योगपरंपरेत यांचे विविध अर्थ सांगितले आहेत; परंतु प्रत्येक अनुभवाला दिव्य संकेत मानणे आवश्यक नाही. शरीराची स्थिती, मानसिक अवस्था आणि वातावरण यांचाही परिणाम होऊ शकतो. शांत साक्षीभाव ठेवून आवश्यक असल्यास गुरुंचे मार्गदर्शन घ्यावे.

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साधनेत काहींना अंतर्गत प्रकाश, रंग, नाद, स्पंदन किंवा शरीरात सूक्ष्म कंपन जाणवू शकते. योगपरंपरेत यांचे विविध अर्थ सांगितले आहेत; परंतु प्रत्येक अनुभवाला दिव्य संकेत मानणे आवश्यक नाही. शरीराची स्थिती, मानसिक अवस्था आणि वातावरण यांचाही परिणाम होऊ शकतो. शांत साक्षीभाव ठेवून आवश्यक असल्यास गुरुंचे मार्गदर्शन घ्यावे.

Experiences of Light, Sound and Vibration in Meditation

Some seekers may experience inner light, colours, subtle sound, pulsation or fine vibrations in the body. Yoga traditions describe different meanings for such experiences, but not every experience should be treated as a divine sign. Physical condition, mental state and environment can also influence perception. One should remain a calm witness and seek guidance from the Guru when needed.

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Some seekers may experience inner light, colours, subtle sound, pulsation or fine vibrations in the body. Yoga traditions describe different meanings for such experiences, but not every experience should be treated as a divine sign. Physical condition, mental state and environment can also influence perception. One should remain a calm witness and seek guidance from the Guru when needed.