गुरु-कृपा और शक्तिपात का महत्त्व

गुरु-कृपा और शक्तिपात का महत्त्व

सिद्ध महायोग में गुरु केवल बाहरी मार्गदर्शक नहीं, बल्कि साधक के भीतर स्थित आत्मशक्ति को जागृत करने वाले माध्यम माने जाते हैं। शक्तिपात के द्वारा सद्गुरु की कृपा साधक की सुप्त आध्यात्मिक चेतना को स्पर्श करती है। इसके बाद साधना केवल व्यक्तिगत प्रयास पर निर्भर न रहकर जागृत शक्ति के मार्गदर्शन में आगे बढ़ने लगती है। श्रद्धा, नियमित साधना और गुरु-निर्देशों का पालन इस यात्रा को स्थिर बनाते हैं।

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सिद्ध महायोग में गुरु केवल बाहरी मार्गदर्शक नहीं, बल्कि साधक के भीतर स्थित आत्मशक्ति को जागृत करने वाले माध्यम माने जाते हैं। शक्तिपात के द्वारा सद्गुरु की कृपा साधक की सुप्त आध्यात्मिक चेतना को स्पर्श करती है। इसके बाद साधना केवल व्यक्तिगत प्रयास पर निर्भर न रहकर जागृत शक्ति के मार्गदर्शन में आगे बढ़ने लगती है। श्रद्धा, नियमित साधना और गुरु-निर्देशों का पालन इस यात्रा को स्थिर बनाते हैं।