शक्तिपात के बाद साधना कैसे करें?
शक्तिपात के बाद साधना कैसे करें?
शक्तिपात दीक्षा के बाद साधक को किसी अनुभव के पीछे भागने के बजाय नियमित और शांत भाव से साधना करनी चाहिए। स्वच्छ तथा शांत स्थान पर निश्चित समय में बैठना उपयोगी होता है। साधना के दौरान होने वाली स्वाभाविक क्रियाओं को बलपूर्वक रोकना या अपनी ओर से उत्पन्न करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। साधक को गुरु द्वारा बताई गई विधि, संयमित दिनचर्या और सात्त्विक जीवन का पालन करना चाहिए।
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शक्तिपात दीक्षा के बाद साधक को किसी अनुभव के पीछे भागने के बजाय नियमित और शांत भाव से साधना करनी चाहिए। स्वच्छ तथा शांत स्थान पर निश्चित समय में बैठना उपयोगी होता है। साधना के दौरान होने वाली स्वाभाविक क्रियाओं को बलपूर्वक रोकना या अपनी ओर से उत्पन्न करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। साधक को गुरु द्वारा बताई गई विधि, संयमित दिनचर्या और सात्त्विक जीवन का पालन करना चाहिए।