8. साधना के दौरान स्वतः होने वाली क्रियाएँ क्या होती हैं?

8. साधना के दौरान स्वतः होने वाली क्रियाएँ क्या होती हैं?

साधना के दौरान स्वतः होने वाली क्रियाएँ क्या होती हैं?

शक्तिपात दीक्षा के पश्चात साधना के समय शरीर, श्वास या मन में जो क्रियाएँ बिना किसी प्रयास के स्वतः होने लगती हैं, उन्हें स्वतः क्रियाएँ (Automatic Kriyas) कहा जाता है। इनमें शरीर का हिलना, कंपन, विशेष प्रकार की श्वास, मंत्रोच्चार, आँसू, हँसी, मौन अथवा अन्य सूक्ष्म गतिविधियाँ सम्मिलित हो सकती हैं।

ये क्रियाएँ साधक द्वारा जानबूझकर नहीं की जातीं। सिद्ध महायोग परंपरा के अनुसार जागृत शक्ति साधक की आवश्यकता के अनुसार उसके भीतर कार्य करती है और चित्त के शुद्धीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है।

साधक का कार्य केवल इनका साक्षी बने रहना है। इन्हें रोकने, बढ़ाने या कृत्रिम रूप से उत्पन्न करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।