9. क्या साधक अन्य साधनाएँ भी कर सकता है?

9. क्या साधक अन्य साधनाएँ भी कर सकता है?

क्या साधक अन्य साधनाएँ भी कर सकता है?

शक्तिपात दीक्षा के बाद जागृत शक्ति साधक के आध्यात्मिक विकास का कार्य स्वयं प्रारम्भ कर देती है। फिर भी यदि साधक पहले से जप, पूजा, स्वाध्याय या अन्य सात्त्विक साधनाएँ करता रहा है, तो वह उन्हें श्रद्धापूर्वक जारी रख सकता है, बशर्ते वे उसकी मुख्य साधना में बाधा न बनें।

सिद्ध महायोग परंपरा किसी साधक पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाती। बल्कि यह समझाती है कि साधना का केंद्र गुरु-कृपा से जागृत हुई शक्ति होनी चाहिए। जैसे-जैसे साधक की साधना परिपक्व होती है, वैसे-वैसे उसे स्वयं अनुभव होने लगता है कि कौन-सी साधनाएँ स्वाभाविक रूप से जारी रखनी हैं और कौन-सी स्वतः छूटती जा रही हैं।

मुख्य बात यह है कि साधना नियमित, श्रद्धापूर्वक और गुरु के मार्गदर्शन में की जाए।