परम पूज्य योगीराज श्री वामनराव गुळवणी महाराज

परम पूज्य योगीराज श्री वामनराव गुळवणी महाराज
परमपूज्य योगीराज श्री वामनराव गुळवणी महाराज
Param Pujya Yogiraj Shri Vamanrao Gulavani Maharaj
प. पू. योगीराज श्री वामनराव गुळवणी महाराज दत्त संप्रदाय के महान योगतपस्वी, शक्तिपात दीक्षा के प्रभावशाली प्रसारक और लाखों साधकों के आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे। उनका जन्म 23 दिसंबर 1886 को कोल्हापुर जिले के कुडुत्री गाँव में हुआ। उनके माता-पिता दत्तभक्त थे, इसलिए बाल्यकाल से ही उन्हें सात्त्विक और धार्मिक वातावरण मिला। वे एक प्रतिभाशाली चित्रकार थे। उन्होंने मुंबई के जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में अध्ययन किया और पुणे के नूतन मराठी विद्यालय में चित्रकला शिक्षक के रूप में कार्य किया। उन्हें परमहंस परिव्राजकाचार्य श्री वासुदेवानंद सरस्वती, अर्थात टेंबे स्वामी महाराज, से अनुग्रह मिला। बाद में हुशंगाबाद में प. पू. लोकनाथ…
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प. पू. योगीराज श्री वामनराव गुळवणी महाराज दत्त संप्रदाय के महान योगतपस्वी, शक्तिपात दीक्षा के प्रभावशाली प्रसारक और लाखों साधकों के आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे। उनका जन्म 23 दिसंबर 1886 को कोल्हापुर जिले के कुडुत्री गाँव में हुआ। उनके माता-पिता दत्तभक्त थे, इसलिए बाल्यकाल से ही उन्हें सात्त्विक और धार्मिक वातावरण मिला।
वे एक प्रतिभाशाली चित्रकार थे। उन्होंने मुंबई के जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में अध्ययन किया और पुणे के नूतन मराठी विद्यालय में चित्रकला शिक्षक के रूप में कार्य किया। उन्हें परमहंस परिव्राजकाचार्य श्री वासुदेवानंद सरस्वती, अर्थात टेंबे स्वामी महाराज, से अनुग्रह मिला। बाद में हुशंगाबाद में प. पू. लोकनाथ तीर्थ स्वामी महाराज से उन्हें योगदीक्षा और शक्तिपात की परंपरा का ज्ञान प्राप्त हुआ।
वर्ष 1924 से उन्होंने योग्य साधकों को शक्तिपात दीक्षा देना प्रारंभ किया। वर्ष 1965 में पुणे में श्री वासुदेव निवास की स्थापना की। उन्होंने टेंबे स्वामी महाराज के वाङ्मय के पुनर्मुद्रण और प्रचार का महत्वपूर्ण कार्य किया।
15 जनवरी 1974 को उन्होंने देह त्याग किया। उनकी शिक्षा सरल थी—नामस्मरण, श्रद्धा, साधना, सेवा और समत्व।
परमपूज्य योगीराज श्री वामनराव गुळवणी महाराज हे महाराष्ट्रातील सिद्ध महायोग आणि शक्तिपात परंपरेचे महान संत होते. त्यांच्या साधना, गुरु-भक्ती आणि कृपादृष्टीमुळे असंख्य साधकांच्या जीवनात आध्यात्मिक जागरण घडले.
संपूर्ण चरित्र वाचा
परमपूज्य योगीराज श्री वामनराव गुळवणी महाराज यांचा जन्म 23 डिसेंबर 1886 रोजी झाला. बाल्यापासूनच त्यांच्यात भक्ती, साधना आणि अध्यात्माची गाढ ओढ होती.
गुरुकृपेने त्यांना शक्तिपात योगाचा दिव्य अनुभव प्राप्त झाला. त्यांनी साधकांना ध्यान, मंत्रजप, गुरुसेवा आणि अंतर्मुख साधनेचा मार्ग दाखवला.
त्यांच्या सान्निध्यात अनेक साधकांना कुंडलिनी जागृती, ध्यानातील स्थिरता आणि आत्मानुभूतीची दिशा मिळाली. त्यांनी शक्तिपात परंपरेचे कार्य महाराष्ट्रात प्रभावीपणे रुजवले.
त्यांचे व्यक्तिमत्त्व अत्यंत प्रेमळ, विनम्र आणि तेजस्वी होते. पुण्यातील श्री वासुदेव निवास हे त्यांच्या परंपरेचे महत्त्वपूर्ण केंद्र बनले.
15 जानेवारी 1974 रोजी त्यांनी देहत्याग केला. त्यांची आध्यात्मिक परंपरा आजही अखंडपणे साधकांचे मार्गदर्शन करीत आहे.
Param Pujya Yogiraj Shri Vamanrao Gulavani Maharaj was one of Maharashtra’s great saints of Siddha Mahayog and the Shaktipat tradition. Through his sadhana, devotion to the Guru and compassionate grace, countless seekers experienced spiritual awakening.
Read full biography
Param Pujya Yogiraj Shri Vamanrao Gulavani Maharaj was born on 23 December 1886. From childhood he showed a deep attraction toward devotion, meditation and spiritual life.
Through the grace of his Guru he received profound realization in Shaktipat Yoga. He guided seekers in meditation, mantra-japa, guru-seva and inward spiritual practice.
Many practitioners experienced Kundalini awakening, steadiness in meditation and a clearer path toward self-realization in his presence. He played a major role in establishing the Shaktipat tradition in Maharashtra.
His personality was loving, humble and spiritually radiant. Shri Vasudev Nivas in Pune became an important centre of his living tradition.
He left his physical body on 15 January 1974. His spiritual lineage continues to guide seekers even today.