साधक का आहार, व्यवहार और दिनचर्या

साधक का आहार, व्यवहार और दिनचर्या

साधना की स्थिरता के लिए सात्त्विक, संतुलित और शरीर के अनुकूल भोजन उपयोगी माना गया है। अत्यधिक भोजन, नशा, अनियमित नींद और उत्तेजक जीवनशैली मन की शांति को प्रभावित कर सकती है। सत्य, संयम, मधुर वाणी, स्वच्छता और नियमितता साधक के व्यवहार का आधार होने चाहिए। कठोर नियम बनाने के बजाय धीरे-धीरे स्वस्थ परिवर्तन अपनाना अधिक व्यावहारिक है। साधना का प्रभाव जीवन के प्रत्येक आचरण में दिखाई देना चाहिए।

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साधना की स्थिरता के लिए सात्त्विक, संतुलित और शरीर के अनुकूल भोजन उपयोगी माना गया है। अत्यधिक भोजन, नशा, अनियमित नींद और उत्तेजक जीवनशैली मन की शांति को प्रभावित कर सकती है। सत्य, संयम, मधुर वाणी, स्वच्छता और नियमितता साधक के व्यवहार का आधार होने चाहिए। कठोर नियम बनाने के बजाय धीरे-धीरे स्वस्थ परिवर्तन अपनाना अधिक व्यावहारिक है। साधना का प्रभाव जीवन के प्रत्येक आचरण में दिखाई देना चाहिए।