10. साधना के समय आने वाले विचारों का क्या करना चाहिए?

10. साधना के समय आने वाले विचारों का क्या करना चाहिए?

साधना के समय आने वाले विचारों का क्या करना चाहिए?

ध्यान या साधना के समय विचारों का आना एक सामान्य प्रक्रिया है। अनेक साधक यह समझते हैं कि विचार आना साधना में बाधा है, जबकि सिद्ध महायोग परंपरा इसे अलग दृष्टि से देखती है।

जागृत शक्ति साधक के भीतर संचित संस्कारों को धीरे-धीरे बाहर लाती है। यही संस्कार कभी विचारों, कभी भावनाओं और कभी स्मृतियों के रूप में सामने आ सकते हैं। यदि साधक उन्हें दबाने का प्रयास करता है तो मानसिक संघर्ष बढ़ सकता है।

इसलिए साधना के समय आने वाले विचारों को रोकने के बजाय उनका साक्षी बनना चाहिए। उन्हें आने और जाने देना चाहिए। धीरे-धीरे जागृत शक्ति स्वयं चित्त का शुद्धीकरण करती है और मन स्वाभाविक रूप से शांत होने लगता है। यही कारण है कि सिद्ध महायोग में साधक को सहजता, धैर्य और गुरु-कृपा पर विश्वास बनाए रखने की सलाह दी जाती है।