7. शक्तिपात दीक्षा के बाद साधक को कौन-कौन से अनुभव हो सकते हैं?

7. शक्तिपात दीक्षा के बाद साधक को कौन-कौन से अनुभव हो सकते हैं?

शक्तिपात दीक्षा के बाद साधक को कौन-कौन से अनुभव हो सकते हैं?

शक्तिपात दीक्षा के पश्चात प्रत्येक साधक के अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं। किसी को ध्यान के समय गहन शांति का अनुभव होता है, किसी को शरीर में कंपन, स्वतः होने वाली क्रियाएँ, आँसू, हँसी, मौन, आनंद अथवा दिव्य स्पंदन का अनुभव हो सकता है।

सिद्ध महायोग परंपरा के अनुसार ये अनुभव साधना का अंतिम लक्ष्य नहीं हैं। इनका उद्देश्य साधक के चित्त का शुद्धीकरण तथा पुराने संस्कारों का क्षय करना है। समय के साथ साधना अधिक सूक्ष्म होती जाती है और साधक बाहरी अनुभवों से आगे बढ़कर आंतरिक शांति एवं आत्मानुभूति की ओर अग्रसर होता है।

इसलिए अनुभवों की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। प्रत्येक साधक की आध्यात्मिक यात्रा उसकी अपनी होती है।